
जगत के रंग क्या देखूं – भजन (Jagat Ke Rang Kya Dekhun)
जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है । क्यों भटकूँ गैरों के दर पे, तेरा दरबार काफी है ॥ नहीं चाहिए ये दुनियां

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है । क्यों भटकूँ गैरों के दर पे, तेरा दरबार काफी है ॥ नहीं चाहिए ये दुनियां

मेरा हाथ पकड़ ले रे, कान्हा दिल मेरा घबराये, काले काले बादल, गम के बादल, सिर पे मेरे मंडराये, ॥ मेरा हाथ पकड़ लें रे,

जीवन है तेरे हवाले, मुरलिया वाले, जीवन हैं तेरे हवाले, मुरलिया वाले । हम कठ पुतली तेरे हाथ की, हम कठ पुतली तेरे हाथ की,

रीझा भरी घडी यह आई, घर घर होई रोशनाई मात यशोदा लल्ला जाया, सुनंदा ने थाल वजायी कान्हा वे असां तेरा जन्मदिन मनावणा मोहना वे

मैं तो आई वृन्दावन धाम, किशोरी तेरे चरनन में । किशोरी तेरे चरनन में, श्री राधे तेरे चरनन में ॥ ब्रिज वृन्दावन की महारानी, मुक्ति

बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा, दूर करो दुख मेरा, बिहारी जी, श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा ॥ सुना है जो

गोविंदा आला रे आला ज़रा मटकी सम्भाल बृजबाला अरे एक दो तीन चार संग पाँच छः सात हैं ग्वाला ॥ गोविंदा आला रे…॥ आई माखन
