
हरि हरि हरि सुमिरन करो – भजन (Hari Hari Hari Sumiran Karo)
हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो, हरि चरणारविन्द उर धरो हरे राम हरे राम रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा करे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे

हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो, हरि चरणारविन्द उर धरो हरे राम हरे राम रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा करे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे

राम नाम सोहि जानिये, जो रमता सकल जहान घट घट में जो रम रहा, उसको राम पहचान तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार, उदासी मन काहे

जयपुर से लाई मैं तो, चुनरी रंगवाई के, गोटा किनारी अपने, हाथो लगवाई के, मैया को ओढ़ाउंगी, द्वारे पे जाइके ॥ चंदा की किरणों से,

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए ओ मैया तेरे दरबार, में हाँ तेरे दीदार, कि मैं आऊंगा कभी न फिर जाऊँगा भेजा है बुलावा, तूने

चौसठ जोगणी रे भवानी, देवलिये रमजाय, घूमर घालणि रे भवानी, देवलिये रमजाय ॥ देवलिये रमजाय म्हारे, आंगणिये रमजाय, चौसठ जोगणी रे भवानी, देवलिये रमजाय, घूमर

दृष्टि हम पे दया की माँ डालो, बडी संकट की आई घड़ी है । द्वार पर तेरे हम भी खड़े है, आँखो में आँसुओ कि

या देवी सर्वभूतेषु, दया-रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः ॥ दुर्गा दुर्गति दूर कर, मंगल कर सब काज । मन मंदिर उज्वल करो,
