
सीता कल्याण वैभोगमे (Seetha Kalyana Vaibhogame)
सीता कल्याण वैभोगमे राम कल्याण वैभोगमे पवनज स्तुति पात्र पावन चरित्र रवि सोम वर नेत्र रमणीय गात्र भक्त जन परिपाल भरित शर जाल भुक्ति मुक्तिद

सीता कल्याण वैभोगमे राम कल्याण वैभोगमे पवनज स्तुति पात्र पावन चरित्र रवि सोम वर नेत्र रमणीय गात्र भक्त जन परिपाल भरित शर जाल भुक्ति मुक्तिद

राम राम राम राम नाम तारकम् राम कृष्ण वासुदेव भक्ति मुक्ति दायकम् राम राम राम राम नाम तारकम् राम कृष्ण वासुदेव भक्ति मुक्ति दायकम् जानकी

गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस, उत्तर भारत में अधिक प्रसिद्ध है। गोस्वामी तुलसीदासजी कृत संपूर्ण रामायण का पाठ करने में कुछ दिन का समय

राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे । सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने ॥ इस मंत्र को श्री राम तारक मंत्र भी कहा जाता है। और इसका

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् ॥१॥ दारिद्र्यरणसंहर्त्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम् । विदेहराजतनयां राघवानन्दकारिणीम् ॥२॥ भूमेर्दुहितरं विद्यां नमामि प्रकृतिं शिवाम् । पौलस्त्यैश्वर्यसंहत्रीं भक्ताभीष्टां सरस्वतीम् ॥३॥

॥ दोहा ॥ हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड । शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड ॥ जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री

॥ दोहा॥ जय जय माता शीतला , तुमहिं धरै जो ध्यान । होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धी बल ज्ञान ॥ घट-घट वासी शीतला, शीतल
