Sandeep Bishnoi

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श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्रम् विष्णुपुराणान्तर्गतम् (Mahalakshmi Stotram From Vishnupuran)

श्रीगणेशाय नमः। श्रीपराशर उवाच सिंहासनगतः शक्रस्सम्प्राप्य त्रिदिवं पुनः। देवराज्ये स्थितो देवीं तुष्टावाब्जकरां ततः॥ १॥ इन्द्र उवाच नमस्ये सर्वलोकानां जननीमब्जसम्भवाम्। श्रियमुन्निद्रपद्माक्षीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्॥ २॥ पद्मालयां पद्मकरां पद्मपत्रनिभेक्षणाम्

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श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् (Shri Laxmi Narayan Stotram)

श्रीनिवास जगन्नाथ श्रीहरे भक्तवत्सल । लक्ष्मीपते नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात् ॥१॥ राधारमण गोविंद भक्तकामप्रपूरक । नारायण नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात् ॥२॥ दामोदर महोदार सर्वापत्तीनिवारण ।

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श्री कृष्णाष्टकम् – भजे व्रजैक मण्डनम् (Krishnashtakam – Bhaje Vrajaik Maṇḍanam)

भजे व्रजैक मण्डनम्, समस्त पाप खण्डनम्, स्वभक्त चित्त रञ्जनम्, सदैव नन्द नन्दनम्, सुपिन्छ गुच्छ मस्तकम् , सुनाद वेणु हस्तकम् , अनङ्ग रङ्ग सागरम्, नमामि कृष्ण

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राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत्र (Radha Kriya Kataksh Stotram)

मुनीन्द्र–वृन्द–वन्दिते त्रिलोक–शोक–हारिणि प्रसन्न-वक्त्र-पण्कजे निकुञ्ज-भू-विलासिनि व्रजेन्द्र–भानु–नन्दिनि व्रजेन्द्र–सूनु–संगते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥१॥ अशोक–वृक्ष–वल्लरी वितान–मण्डप–स्थिते प्रवालबाल–पल्लव प्रभारुणांघ्रि–कोमले । वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥२॥ अनङ्ग-रण्ग मङ्गल-प्रसङ्ग-भङ्गुर-भ्रुवां

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मधुराष्टकम्: अधरं मधुरं वदनं मधुरं (Madhurashtakam Adhram Madhuram Vadnam Madhuram)

मधुराष्टकं में श्रीकृष्ण के बालरूप को मधुरता से माधुरतम रूप का वर्णन किया गया है। श्रीकृष्ण के प्रत्येक अंग, गतिविधि एवं क्रिया-कलाप मधुर है, और

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