
श्री जगन्नाथ अष्टकम (Shri Jagannath Ashtakam)
कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो मुदाभीरी नारी वदन कमला स्वाद मधुपः रमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदो जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥१॥

कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो मुदाभीरी नारी वदन कमला स्वाद मधुपः रमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदो जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥१॥

श्री कृष्ण चैतन्य नाम धुन संकीर्तन, इस्कान द्वारा मनन करने वाली प्रसिद्ध धुन। (जय) श्रीकृष्णचैतन्य प्रभु नित्यानंद । श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्तवृंद ॥

पुष्पांजलि का अर्थ है फूलों से भरी हुई अंजलि जो किसी देवता अथवा महापुरुष को अर्पित की जाती है। धार्मिक अनुष्ठानों अर्थात हवन, पूजन, आरती,

प्रज्ञानं ब्रह्म जिसका शाब्दिक अर्थ है ज्ञान ही ब्रह्म है। यह भारत के पुरातन हिंदू शास्त्र ‘ऋग्वेद’ का ‘महावाक्य’ है चार वेदों में एक-एक महावाक्य

अथ ध्यानम् – दिगंबरं भस्मसुगंध लेपनं चक्रं त्रिशूलं डमरुं गदां च । पद्मासनस्थं रविसोमनेत्र्म दत्तात्रयं नमभीष्टसिद्धिदम् ॥ १ ॥ काषायवस्त्रं करदंडधारिणं कमंडलुं पद्मकरेण शंखम् ।

श्रीदत्तात्रेयाष्टोत्तरशतनामावली | श्री दत्तात्रेय 108 नाम ॐ श्रीदत्ताय नमः । ॐ देवदत्ताय नमः । ॐ ब्रह्मदत्ताय नमः । ॐ विष्णुदत्ताय नमः । ॐ शिवदत्ताय नमः

॥ श्री दत्तात्रेय स्तोत्रम् ॥ जटाधरं पाण्डुराङ्गं शूलहस्तं कृपानिधिम् । सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ॥ विनियोग – अस्य श्रीदत्तात्रेयस्तोत्रमन्त्रस्य भगवान् नारदऋषिः । अनुष्टुप् छन्दः ।
