
धनवानों का मान है जग में.. (Dhanawanon Ka Mann Hai Jag Mein)
धनवानों का मान है जग में,निर्धन का कोई मान नहीं ।ए मेरे भगवन बता दे,निर्धन क्या इन्सान नहीं ॥पास किसी के हीरे मोती,पास किसी के

धनवानों का मान है जग में,निर्धन का कोई मान नहीं ।ए मेरे भगवन बता दे,निर्धन क्या इन्सान नहीं ॥पास किसी के हीरे मोती,पास किसी के

कृपालु भगवन् कृपा हो करते,इसी कृपा से नर तन मिला है ।दयालु भगवन् दया हो करते,इसी दया से ये मन मिला है ॥अजर, अमर तुम

हे जग स्वामी, अंतर्यामी,तेरे सन्मुख आता हूँ ।सन्मुख आता, मैं शरमाताभेंट नहीं कुछ लाता हूँ॥ हे जग स्वामी…॥ पापी जन हूँ, मैं निर्गुण हूँद्वार तेरे

जगदीश ज्ञान दाता, सुख मूल शोकहारी ।भगवन् ! तुम्हीं सदा हो, निष्पक्ष न्यायकारी ॥सब काल सर्व ज्ञाता, सविता पिता विधाता ।सब में रमे हुए हो,

जगन्नाथ जगन्नाथ जगन्नाथ जगन्नाथचारों धाम में सबसे बड़ा है ,जगन्नाथ धामजगन्नाथ भगवान की, महिमा अपरम्पारभक्तों को दर्शन देते,करते उनके काम।कर लो भक्तों ,जगन्नाथ का ध्यान

नवजात शिशु के जन्म बधाई की खुशी मे यह गीत या भजन भारत के जैन समाज मे बहुत लोकप्रिय है!बजे कुण्डलपर में बधाई,के नगरी में

घर घर बधाई बाजे रे देखो,घर घर बधाई बाजे रे,ढोलक नगाड़ा वाजे रे देखो,ढोलक नगाड़ा वाजे रेजन में अयोध्या में राम लला की,माता कौशल्या खिलाये
