
हम वन के वासी, नगर जगाने आए: भजन (Hum Van Ke Vaasi Nagar Jagane Aaye)
हम वन के वासी, नगर जगाने आए ॥ दोहा – वन वन डोले कुछ ना बोले, सीता जनक दुलारी, फूल से कोमल मन पर सहती,

हम वन के वासी, नगर जगाने आए ॥ दोहा – वन वन डोले कुछ ना बोले, सीता जनक दुलारी, फूल से कोमल मन पर सहती,

मेरा तो बस एक सहारा, राम ए माँ, लागे सबते प्यारा, मेरा राम ए माँ, लागे सबते प्यारा, मेरा राम ए माँ ॥ कलयुग के

राम नाम का प्याला प्यारे, पि ले सुबहो शाम, राम राम राम, सीताराम राम राम, राम राम राम, सीताराम राम राम ॥ राम नाम जो

ऊधम ऐसा मचा ब्रज में, सब केसर रंग उमंगन सींचें चौपद छज्जन छत्तन, चौबारे बैठ के केसर पीसें । भर पिचकारी दई पिय को, पीछे

तेरी छाया मे, तेरे चरणों मे, मगन हो बैठूं, तेरे भक्तो मे॥ तेरे दरबार मे मैया खुशी मिलती है, जिंदगी मिलती है रोतों को हँसी

करवा चौथ, नवदुर्गा, दुर्गा पूजा, नवरात्रि, नवरात्रे, नवरात्रि, माता की चौकी, देवी जागरण, जगराता, शुक्रवार दुर्गा तथा अष्टमी के शुभ अवसर पर गाये जाने वाला

जिनका मैया जी के चरणों से संबंध हो गया । उनके घर में आनंद ही आनंद हो गया ॥ माँ की शक्ति को जो भी,
