
बाँधु जिसपे राखी, वो कलाई चाहिए: भजन (Bandhu jispe Rakhi wo Kalai chahiye)
बाँधु जिसपे राखी, वो कलाई चाहिए, बहना कहने वाला, एक भाई चाहिए, माँ पूरी मेरी आस कर, खड़ी मैं कब से तेरे दर ॥ हिरे

बाँधु जिसपे राखी, वो कलाई चाहिए, बहना कहने वाला, एक भाई चाहिए, माँ पूरी मेरी आस कर, खड़ी मैं कब से तेरे दर ॥ हिरे

अम्बे अम्बे माँ अम्बे अम्बे, अम्बे अम्बे भवानी माँ जगदम्बे ॥ श्लोक – जिसने वर माँगा, तो वरदान दिया है तुमने, मुर्ख से मुर्ख को

जय जय जननी श्री गणेश की जय जय जननी श्री गणेश की प्रतीभा परमेश्वर परेश की प्रतीभा परमेश्वर परेश की जय जय जननी श्री गणेश

आया बुलावा भवन से, मैं रह ना पाई ॥ श्लोक – तेरे दरश की धुन में माता, हम है हुए मतवाले, रोक सकी ना आंधियां

जय गणेश जय गजवदन, कृपा सिंधु भगवान । मूसक वाहन दीजिये, ज्ञान बुद्धि वरदान ॥1॥ शिव नंदन गौरी तनय, प्रथम पूज्य गणराज । सकल अमंगल

तेरे दर पे माँ, जिंदगी मिल गई है, मुझे दुनिया भर की, ख़ुशी मिल गई है, तेरे दर पे माँ, जिंदगी मिल गई है ॥

जिस भजन में राम का नाम ना हो, उस भजन को गाना ना चाहिए ॥ चाहे बेटा कितना प्यारा हो, उसे सिर पे चढ़ाना ना
