
सीता राम दरस रस बरसे – भजन (Sita Ram Daras Ras Barse Jese Savan Ki Jhadi)
चहुं दिशि बरसें राम रस, छायों हरस अपार, राजा रानी की करे, सब मिल जय जयकार । कौशल नंदन राजा राम, जानकी वल्लभ राजा राम,

चहुं दिशि बरसें राम रस, छायों हरस अपार, राजा रानी की करे, सब मिल जय जयकार । कौशल नंदन राजा राम, जानकी वल्लभ राजा राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम श्री राम, जय राम, जय जय राम श्री राम, जय राम, जय जय राम श्री राम, जय राम,

ब्रह्मादि देवताओं द्वारा भगवान विष्णु का आव्हान, जिसके बाद भगवान विष्णु ने प्रभु श्री राम के अवतार की घोषणा की। यह छंद तुलसीदास रचित रामचरित

संकट हरलो मंगल करदो, प्यारे शिव गौरा के लाल, अब विनती सुनलो गणपति देवा ॥ हे गणनायक देव गजानन, मूषक चढ़कर आओ, हाथ जोड़कर द्वार

गजानन गणेशा है गौरा के लाला, दयावन्त एकदन्त स्वामी कृपाला ॥ है सबसे जुदा और सबसे ही न्यारी, है शंकर के सूत तेरी मूषक सवारी,

ऊँचे ऊँचे पर्वत पे, शारदा माँ का डेरा है, मतलब की दुनिया में, सच्चा प्रेम तेरा है, ऊंचे ऊंचे पर्वत पे, मैया का बसेरा है,

नौरता की रात मैया, गरबे रमवा आणो है, थाने वादों निभाणो है, नौरता की रात ॥ साथी सहेलियां, मईया जोवे थारी बाट, मईया जी थाने
