
कनक भवन दरवाजे पड़े रहो – भजन (Kanak Bhawan Darwaje Pade Raho)
पूज्य स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज एक बहुत अच्छे छंद, चौपाइयां, पद्य, कविताएं एवं भजन लेखक थे। प्रभु श्रीसीतारामजी काटो कठिन कलेश कनक भवन के द्वार

पूज्य स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज एक बहुत अच्छे छंद, चौपाइयां, पद्य, कविताएं एवं भजन लेखक थे। प्रभु श्रीसीतारामजी काटो कठिन कलेश कनक भवन के द्वार

नित नयो लागे साँवरो, इकि लेवा नज़र उतार, नजर ना लग जावै, एकी लेवा नज़र उतार, नज़र ना लग जावे । सोने के सिंघासन पर,

लागे वृन्दावन नीको, आली* मोहे लागे वृन्दावन नीको। लागे वृन्दावन नीको, आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको। आली मन लागे वृन्दावन नीको। घर घर तुलसी

बांके बिहारी हमें भूल ना जाना, जल्दी जल्दी वृन्दावन, हमको बुलाना, बांके बिहारी हमे भूल ना जाना ॥ जपते रहे हम नाम तुम्हारा, छूटे कभी

काले काले बदरा, घिर घिर आ रहे है, ऐ जी झूला डालो, हम्बे झूला डालो, कदम्ब की डाल, कारे कारे बदरा, घिर घिर आ रहे

आता रहा है सांवरा, आता ही रहेगा, दीनों की लाज श्याम, दीनों की लाज श्याम, बचाता ही रहेगा, आता रहा है साँवरा, आता ही रहेगा

मेरा आपकी दया से सब काम हो रहा है। करते हो तुम कन्हिया मेरा नाम हो रहा है॥ ॥ मेरा आपकी दया से…॥ पतवार के
