परदे में बैठे-बैठे,
यूँ ना मुस्कुराइये,
आ गए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥
परदा तेरा हमें नहीं,
मंजूर सांवरे,
बैठा है छुप के दीवानो से,
क्यों दूर सांवरे,
मैं भी तो आया दो कदम,
जरा तुम भी बढ़ाइए,
आगए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥
हम चाहने वाले हैं तेरे,
हमे है तुमसे मोहब्बत,
कर दो करम जरा दिखा दो,
अब सांवरी सूरत,
प्यासी निगाहे दीद की,
जरा नजरे मिलाइए,
आ गए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥
तेरी इक झलक को प्यारे,
मेरा अब दिल बेकरार है,
दीदार की तमन्ना मुझे अब,
तेरा इंतजार है,
रह-रह के हमें इस तरह,
यूँ न सताइए,
आ गए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥
तू ही जिंदगी है बंदगी,
तू ही आरजू हमारी,
अरमान मेरे दिल का करो,
पूरा बांके बिहारी
चित्र विचत्र को अपने प्रेम का,
पागल बनाइये ,
आ गए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥
लोहट-हांसा को जाम्भोजी का अंतिम उपदेश
श्री हनुमान बाहुक (Shri Hanuman Bahuk)
पार्श्व / परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा (Parshva / Parivartani Ekadashi Vrat Katha)
परदे में बैठे-बैठे,
यूँ ना मुस्कुराइये,
आ गए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥








