परदे में बैठे-बैठे,
यूँ ना मुस्कुराइये,
आ गए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥
परदा तेरा हमें नहीं,
मंजूर सांवरे,
बैठा है छुप के दीवानो से,
क्यों दूर सांवरे,
मैं भी तो आया दो कदम,
जरा तुम भी बढ़ाइए,
आगए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥
हम चाहने वाले हैं तेरे,
हमे है तुमसे मोहब्बत,
कर दो करम जरा दिखा दो,
अब सांवरी सूरत,
प्यासी निगाहे दीद की,
जरा नजरे मिलाइए,
आ गए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥
तेरी इक झलक को प्यारे,
मेरा अब दिल बेकरार है,
दीदार की तमन्ना मुझे अब,
तेरा इंतजार है,
रह-रह के हमें इस तरह,
यूँ न सताइए,
आ गए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥
तू ही जिंदगी है बंदगी,
तू ही आरजू हमारी,
अरमान मेरे दिल का करो,
पूरा बांके बिहारी
चित्र विचत्र को अपने प्रेम का,
पागल बनाइये ,
आ गए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥
कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 5 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 5)
शीतलाष्टक स्तोत्र (Sheetla Ashtakam Stotram)
परदे में बैठे-बैठे,
यूँ ना मुस्कुराइये,
आ गए तेरे दीवाने,
जरा परदा हटाइए ॥








