विधाता तू हमारा है,
तू ही विज्ञान दाता है ।
बिना तेरी दया कोई,
नहीं आनन्द पाता है ॥
तितिक्षा को कसौटी से,
जिसे तू जांच लेता है ।
उसी विद्याधिकारी को,
अविद्या से छुड़ाता है ॥
सताता जो न औरों को,
न धोखा आप खाता है ।
वही सद्भक्त है तेरा,
सदाचारी कहाता है ॥
सदा जो न्याय का प्यारा,
प्रजा को दान देता है ।
महाराजा ! उसी को तू,
बड़ा राजा बनाता है ॥
तजे जो धर्म को,
धारा कुकर्मों को बहाता है ।
न ऐसे नीच पापी को,
कभी ऊंचा चढ़ाता है ॥
अयोध्या नाथ से जाकर पवनसुत हाल कह देना - भजन (Ayodhya Nath Se Jakar Pawansut Hal Kah Dena )
छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल - भजन (Choti Choti Gaiyan Chote Chote Gwal)
हमने आँगन नहीं बुहारा - भजन (Hamne Aangan Nahi Buhara, Kaise Ayenge Bhagwan)
स्वयंभू शंकरानन्दी तुझे जो जान लेता है ।
वही कैवल्य सत्ता की महत्ता में समाता है ॥
Post Views: 498








