तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हम ने सुना है,
श्याम मीरा को तारा,
वीणा का करके बहाना,
श्याम हम भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हमने सुना है,
श्याम द्रोपदी को तारा,
साडी का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हमने सुना है,
श्याम कुब्जा को तारा,
चन्दन का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हमने सुना है,
श्याम गणिका को तारा,
तोते का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
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चालीसा: भगवान श्री शीतलनाथ जी (Bhagwan Shri Sheetalnath Ji)
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हमने सुना है,
श्याम अर्जुन को तारा,
गीता का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हमने सुना है,
श्याम प्रहलाद को तारा,
खम्बे का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हमने सुना है,
श्याम केवट को तारा,
नौका का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥








