तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हम ने सुना है,
श्याम मीरा को तारा,
वीणा का करके बहाना,
श्याम हम भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हमने सुना है,
श्याम द्रोपदी को तारा,
साडी का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हमने सुना है,
श्याम कुब्जा को तारा,
चन्दन का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हमने सुना है,
श्याम गणिका को तारा,
तोते का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
जाम्भोजी का जैसलमेर पधारना भाग 4
महादेव शंकर हैं जग से निराले - भजन (Mahadev Shankar Hain Jag Se Nirale)
चालीसा: भगवान श्री शीतलनाथ जी (Bhagwan Shri Sheetalnath Ji)
हमने सुना है,
श्याम अर्जुन को तारा,
गीता का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हमने सुना है,
श्याम प्रहलाद को तारा,
खम्बे का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥
हमने सुना है,
श्याम केवट को तारा,
नौका का करके बहाना,
श्याम हम को भी तारो ।
तारा है सारा जमाना,
श्याम हम को भी तारो ।
हम को भी तारो,
श्याम हम को भी तारो ॥








