जगदम्बा के दीवानो को,
दरश चाहिए, दरश चाहिए,
हमें माँ तेरी एक,
झलक चाहिए, झलक चाहिए ॥
दया और ममता का मंदिर है तू,
तुझे क्या पता कितनी सूंदर है तू,
गुलाबों के माँ जैसा मन है तेरा,
हमे माँ तेरे जैसा मन चाहिए,
जगदम्बा के दीवानों को,
दरश चाहिए, दरश चाहिए ॥
तेरा रूप सबसे सुहाना लगे,
बिना भक्ति के जी कही ना लगे,
माँ भक्ति में तेरे हम डूबे रहे,
हमें ऐसा तुझसे माँ वर चाहिए,
जगदम्बा के दीवानों को,
दरश चाहिए, दरश चाहिए ॥
कई दैत्य तुमने पछाड़े है माँ,
तेरा शेर रण में दहाड़े है माँ,
तू काली नवदुर्गा तू ज्वाला है माँ,
हमे माँ तेरी ही शरण चाहिए,
जगदम्बा के दीवानों को,
दरश चाहिए, दरश चाहिए ॥
तू पर्वत तू नदियां तू धरती है माँ,
तू पाताल अम्बर सितारों में माँ,
तेरी इन भुजाओं में सृष्टि है माँ,
हमें इन भुजाओं का बल चाहिए,
जगदम्बा के दीवानों को,
दरश चाहिए, दरश चाहिए ॥
कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 25 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 25)
भगवा रंग चढ़ा है ऐसा, और रंग ना भाएगा - भजन (Bhagwa Rang Chadha Hai Aisa Aur Rang Na Bhayega)
हम वन के वासी, नगर जगाने आए: भजन (Hum Van Ke Vaasi Nagar Jagane Aaye)
जगदम्बा के दीवानो को,
दरश चाहिए, दरश चाहिए,
हमें माँ तेरी एक,
झलक चाहिए, झलक चाहिए ॥
दुर्गा चालीसा | आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | माता के भजन








