चित्रकूट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ,
राम मेरे आ जाओ,
चित्रकुट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ ॥
अपने राम जी को,
कहाँ मैं बिठाऊँ,
कहाँ मैं बिठाऊँ,
टुटी फूटी खाट खाट प,
बिछया पुराना टाट,
राम मेरे आ जाओ,
॥ चित्रकुट के घाट घाट..॥
अपने राम जी को,
क्या मैं खिलाऊँ,
क्या मैं खिलाऊँ,
छोटे छोटे पेड़ पेड़ प,
लगे सुनहरी बेर,
राम मेरे आ जाओ,
॥ चित्रकुट के घाट घाट..॥
अपने राम को,
कया मैं पिलाऊं,
कया मैं पिलाऊं,
कपला गाढा दुध,
दुध में पड़ी मलाई खुब,
राम मेरे आ जाओ,
॥ चित्रकुट के घाट घाट…॥
अपने राम जी को,
कहां मैं झुलाऊँ,
कहां मैं झुलाऊँ,
छोटी डाली आम आम प,
झूले सीता राम,
राम मेरे आ जाओ,
॥ चित्रकुट के घाट घाट..॥
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 30 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 30)
भगवद् गीता आरती (Aarti Shri Bhagwat Geeta)
जाम्भोजी के द्वारा बताये गए बिश्नोई समाज के प्रश्न तथा उत्तर
अपने राम जी को,
कैसे मैं रिझाऊँ,
कैसे मैं रिझाऊँ,
दीन हीन मोहे जान,
ना ही कोई भक्ति ज्ञान,
राम मेरे आ जाओ,
॥ चित्रकुट के घाट घाट…॥
चित्रकूट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ,
राम मेरे आ जाओ,
चित्रकुट के घाट घाट पर,
शबरी देखे बाट,
राम मेरे आ जाओ ॥








