कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि,
री लीला गुदवाय लो प्यारी ।
दृगन पै लिख दे दीनदयाल
नासिका पै लिख दे नन्दलाल
कपोलन पै लिख दे गोपाल
माथे लिख दे, मोहन लाल
श्रवनन पै लिख सांवरो, अधरन आनंदकंद,
ठोड़ी पै ठाकुर लिखो, गले में गोकुलचन्द ।
छाती पै लिख छैल, बाँहन पै लिख दे बनवारी ।
कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि,
री लीला गुदवाय लो प्यारी ।
हाथन पै हलधर जी को भईया लिख ,
संग संग तू आनंद-करैया लिख
उंगरिन पै प्यारो कृष्ण कन्हैया लिख
कहूं कहूं वृन्दावन बंसी को बजैया लिख
पेट पै लिख दे परमानन्द
नाभि पै लिख दे तू नन्दनन्द
पिण्डरी पै लिख दे घनश्याम
चरण पै चितचोर को नाम
रोम-रोम में लिख दे मेरो सांवरो गिरिधारी ।
कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि,
री लीला गुदवाय लो प्यारी ।
सखी देखत सब रह गयी कौन प्रेम को फंद
बिसे बिस कोई और नहीं ये छलिया ढोटा नन्द
अंगिया में देखि कसी मुरली परम रसाल
प्यारो प्यारो कह कह हिय लायो नंदलाल ।
कि बन गए नन्दलाल लिलिहारि,
री लीला गुदवाय लो प्यारी ।
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