भगत पुकारे आज मावड़ी,
आके लाज बचा जा ऐ,
दुःख पावे है टाबर थारा,
आके कष्ट मिटा जा ऐ,
भक्त पुकारे आज मावड़ी,
आके लाज बचा जा ऐ ॥
सर पे हमारे गम के बादल,
जब जब भी मंडराते है,
और ना कुछ भी भावे दादी,
थारी याद सतावे है,
सुन ले म्हारी अर्जी दादी,
मन की बात बतावा ऐ,
भक्त पुकारे आज मावड़ी,
आके लाज बचा जा ऐ ॥
कर सोलह श्रृंगार भवानी,
म्हारे घरा जद आवोगा,
तन मन धन सब वार दिया माँ,
यो जीवन अब वारंगा,
डग मग डोले नैया म्हारी,
भव से पार लगा जा ऐ,
भक्त पुकारे आज मावड़ी,
आके लाज बचा जा ऐ ॥
झुंझनू की धरती है पावन,
माटी तिलक लगावा जी,
दिन दुखी दरवाजे आवे,
हर संकट कट जावे जी,
‘आकाश परिचय’ झुक झुक दादी,
थारा दर्शन पावा ऐ,
भक्त पुकारे आज मावड़ी,
आके लाज बचा जा ऐ ॥
भगत पुकारे आज मावड़ी,
आके लाज बचा जा ऐ,
दुःख पावे है टाबर थारा,
आके कष्ट मिटा जा ऐ,
भक्त पुकारे आज मावड़ी,
आके लाज बचा जा ऐ ॥
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