किरपा मिलेगी श्री राम जी की,
भक्ति करो, भक्ति करो,
दया मिलिगी हनुमान जी की,
राम जपो, राम जपो,
दुष्ट दलन हनुमान है,
हनुमान मेरे,
जय हनुमान, जय हनुमान
पतित पावन राम है,
श्री राम मेरे,
जय सिया राम, जय सिया राम
मूरत रख श्री राम की,
मन ध्यान धरो,
ध्यान धरो, ध्यान धरो
भक्ति करो, भक्ति करो
॥ किरपा मिलेगी श्री राम जी…॥
सकल अमंगल हर लेंगे,
हनुमान मेरे,
जय हनुमान, जय हनुमान
तन मन पवन कर देंगे,
श्री राम मेरे,
जय सिया राम, जय सिया राम
शीश झुका कर चरणों में,
प्रणाम करो, प्रणाम करो
भक्ति करो, भक्ति करो
॥ किरपा मिलेगी श्री राम जी…॥
शंकर स्वयं केसरी नंदन,
जय हनुमान,
जय हनुमान, जय हनुमान
विष्णु रूप भगवन है.
मेरे श्री राम,
जय सिया राम, जय सिया राम
विष्णु महेश की लीला का,
गन गान करो,
गान करो, गान करो
भक्ति करो, भक्ति करो
॥ किरपा मिलेगी श्री राम जी…॥
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 11 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 11)
राम से बड़े है भक्त राम के,
जय हनुमान,
जय हनुमान, जय हनुमान
जो नित राम की महिमा गावे,
जय सिया राम, जय सिया राम
अर्पित प्रभु पूजन में जीवन,
प्राण करो, प्राण करो
भक्ति करो, भक्ति करो
॥ किरपा मिलेगी श्री राम जी…॥








