ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ॥
चली कांवड़ियों की टोली,
सब भोले के हमजोली,
गौमुख से गंगाजल वो लाने वाले हैं ।
भोले के कांवड़िया,
मस्त बड़े मत वाले हैं ॥
सब अलग अलग शहरों से चलकर आते हैं,
कंधे पे उठा के कावड़ दौड़े जाते हैं ।
है कठिन डगर पर ये ना,
रुकने वाले हैं ॥
॥ भोले के कावड़िया…॥
कोई भांग धतूरा बेल की पत्रि लाए हैं,
कोई दूध दही मलमल के तिलक लगाए हैं ।
यह सब मस्तानी शिव के,
चाहने वाले हैं ॥
॥ भोले के कावड़िया…॥
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 12 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 12)
प्रज्ञानं ब्रह्म महावाक्य (Prajnanam Brahma)
श्री गंगा स्तोत्रम् (Maa Ganga Stortam)
‘नोधी’ जिद्द छोड़ो कावड़ आप उठा भी लो,
संघ ‘लव’ के शिव भोले की महिमा गा भी लो ।
‘सनी’ ‘दीपक’ भी साथ ही जाने वाले हैं ॥
॥ भोले के कावड़िया…॥
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