दिवाली की रात • स्तोत्र

इंद्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र

जब देवराज ने माँगा खोया वैभव

॥ जम्भ भक्ति ॥

परिचय

इंद्र की प्रार्थना

ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह स्तोत्र देवराज इंद्र द्वारा गाया गया है। स्वर्ग का वैभव खो चुके इंद्र ने माँ लक्ष्मी से कृपा की प्रार्थना की।

श्लोक १

ॐ नमः कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नमः। कृष्णप्रियायै सारायै पद्मायै च नमो नमः॥

कमल में रहने वाली, नारायण की शक्ति, श्रीकृष्ण की प्रिया, सबकी सार और पद्मा नाम वाली देवी को नमस्कार।

श्लोक ३

सर्वसम्पत्स्वरूपायै सर्वदात्र्यै नमो नमः। सुखदायै मोक्षदायै सिद्धिदायै नमो नमः॥

जो सारी संपत्ति का रूप हैं, सब कुछ देती हैं, और सुख, मोक्ष व सिद्धि देने वाली हैं, उन्हें नमस्कार।

श्लोक ७

वैकुण्ठे या महालक्ष्मीर्लक्ष्मीः क्षीरोदसागरे। स्वर्गलक्ष्मीरिन्द्रगेहे राजलक्ष्मीर्नृपालये॥

वैकुण्ठ में महालक्ष्मी, क्षीर सागर में लक्ष्मी, इंद्र के घर स्वर्गलक्ष्मी और राजा के महल में राजलक्ष्मी आप ही हैं।

श्लोक ८

गृहलक्ष्मीश्च गृहिणां गेहे च गृहदेवता

गृहस्थों के घर में आप ही गृहलक्ष्मी और गृहदेवता हैं।

श्लोक १५

यथा माता स्तनन्धानां शिशूनां शैशवे सदा। तथा त्वं सर्वदा माता सर्वेषां सर्वरूपतः॥

जैसे बचपन में माँ बच्चे का पालन करती है, वैसे ही आप हर रूप में सबकी माता हैं।

श्लोक १९

राज्यं देहि श्रियं देहि बलं देहि सुरेश्वरि। कीर्तिं देहि धनं देहि यशो मह्यं च देहि वै॥

हे देवेश्वरी, राज्य, श्री, बल, कीर्ति, धन और यश दीजिए।

विधि

कब पढ़ें

फलश्रुति कहती है कि इसे तीनों संध्याओं में पढ़ना चाहिए। दिवाली की रात पूजा के बाद एक बार पाठ करना शुभ माना जाता है।

॥ जम्भ भक्ति ॥

पूरा स्तोत्र पढ़ें

इंद्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र, फलश्रुति सहित।

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