छठ महापर्व • 13-16 नवंबर
नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक
॥ जम्भ भक्ति ॥
व्रती नदी या घर पर स्नान करके कद्दू-भात और चने की दाल का सात्त्विक भोजन करते हैं।
दिन भर उपवास के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनता है। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
शाम को घाट पर सूप में ठेकुआ, फल और गन्ना सजाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मैया से संतान और परिवार के सुख की प्रार्थना होती है, फिर व्रत खुलता है।
छठ में सूर्य देव और उनकी बहन मानी जाने वाली छठी मैया की पूजा होती है। यह बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का महापर्व है।
॥ जम्भ भक्ति ॥
पहिले पहिल छठी मईया व्रत तोहार, और भी छठ गीत जम्भ भक्ति पर।
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