बिश्नोई नियम • अमावस्या
जाम्भोजी का शब्द 101, सरल भाव
॥ जम्भ भक्ति ॥
गुरु जम्भेश्वर के 29 नियमों में एक नियम अमावस्या का व्रत रखना है। आज दिवाली भी कार्तिक अमावस्या पर है।
नाथोजी बताते हैं कि एक बार अमावस्या के दिन समराथल पर भक्त मंडली में बहस हो गई कि सबसे बड़ा धर्म कौन सा है।
किसी ने तीर्थ को बड़ा कहा, किसी ने अमावस्या व्रत को, किसी ने द्वादशी, किसी ने संक्रांति के दान और किसी ने नवग्रह पूजा को।
शब्द 101
तब जाम्भोजी ने कहा: अमावस्या, संक्रांति और नवग्रह तो नित्य ही तुम्हारे सामने हैं।
शब्द 101
गंगा भी नित्य लहरें ले रही है। जो सतगुरु को पहचानता है, वह सहज ही उसमें स्नान कर लेता है।
सब सोचने लगे कि देवजी ने उनकी बात मानी। फिर पूछा, महाराज! अमावस्या तो महीने में एक बार आती है, नित्य कैसे आएगी?
उत्तर
जाम्भोजी समझाते हैं: मन रूपी धोबी अगर धोना जान ले, तो भीतर कोई मैला वस्त्र नहीं रहता। सच्चा तीर्थ भीतर की शुद्धि है।
अमावस्या का व्रत नियम से रखें, पर साथ में मन की शुद्धि, सत्य और गुरु का ज्ञान ही असली धर्म है।
॥ जम्भ भक्ति ॥
अमावस्या व्रत कथा महात्म्य, शब्द 101 सहित।
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