
श्री महालक्ष्मी अष्टक (Shri Mahalakshmi Ashtakam)
श्री महालक्ष्म्यष्टकम् इंद्र देव द्वारा माता महालक्ष्मी की भक्तिपूर्ण स्तुति है, जिसे पद्म पुराण मे समायोजित किया गया है। श्री शुभ ॥ श्री लाभ ॥

श्री महालक्ष्म्यष्टकम् इंद्र देव द्वारा माता महालक्ष्मी की भक्तिपूर्ण स्तुति है, जिसे पद्म पुराण मे समायोजित किया गया है। श्री शुभ ॥ श्री लाभ ॥

❀ सामूहिक कल्याण के लिये मंत्र – देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या । तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ॥ ❀ विश्व के

भाग्यद लक्ष्मी बारम्मा । नम्मम्म नी सौभाग्यद लक्ष्मी बारम्मा ॥ हेज्जेय मेले हेज्जेयनिक्कुत गेज्जे काल्गळ ध्वनिय तोरुत । सज्जन साधु पूजेय वेळेगे मज्जिगेयोळगिन बेण्णेयन्ते ॥

ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमः महालक्ष्मयै नमः महालक्ष्मयै नमः महालक्ष्मयै नमः ॐ महालक्ष्मयै नमो नमः

जय दुर्गे जय दुर्गे, महिषविमर्दिनी जय दुर्गे । जय दुर्गे जय दुर्गे, महिषविमर्दिनी जय दुर्गे । मंगलकारिणी जय दुर्गे, जगज्जननी जय जय दुर्गे । मंगलकारिणी

॥अथ अग्निहोत्रमंत्र:॥ » जल से आचमन करने के 3 मंत्र ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा ॥१॥ ॐ अमृतापिधानमसि स्वाहा ॥२॥ ॐ सत्यं यश: श्रीर्मयि श्री: श्रयतां स्वाहा

ध्यान दें- श्री विद्या मंत्र दीक्षित व्यक्ति इस सहस्रनाम करने के अधिकारी हैं लेकिन योग्य श्री विद्या गुरु के आदेश पर मंत्र दीक्षित ना हो
