महा शिवरात्रि पूजन पौराणिक व्रत कथा (Maha Shivaratri Pujan Pauranik Vrat Katha)
महाशिवरात्रि पूजन व्रत कथा के से जुड़ी एक रोचक पौराणिक कथा… एक बार चित्रभानु नामक एक शिकारी था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब
महाशिवरात्रि पूजन व्रत कथा के से जुड़ी एक रोचक पौराणिक कथा… एक बार चित्रभानु नामक एक शिकारी था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब
श्री गणेश आरती जो प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है वो गुरु प्रदोष व्रत कहलाता है। गुरुवार प्रदोष व्रत रखने से भक्तों को अपने
ॐ हौं जूं स: ॐ भू र्भुव: स्व:। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम् ॥ उर्वारुक मिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात। स्व: भुव: भू ॐ स:
राजा पृथु ने कहा: हे मुनिश्रेष्ठ नारद जी! आपने कार्तिक माह के व्रत में जो तुलसी की जड़ में भगवान विष्णु का निवास बताकर उस
एक कथा के अनुसार माँ पार्वती ने अपने पूर्व जन्म में भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर गंगा के
भगवान शिव का ध्यान करने मात्र से मन में जो एक छवि उभरती है वो एक वैरागी पुरुष की। इनके एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे
श्री गणेश आरती जो प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है वह प्रदोष भौम प्रदोष व्रत या मंगल प्रदोष व्रत कहलाता है। इसकी कथा इस
