
उज्जैन के महाराज हो, दीनो के दीनानाथ हो – भजन (Ujjain Ke Maharaj Ho Dino Ke Dinanath Ho)
उज्जैन के महाराज हो, दीनो के दीनानाथ हो, तुम कालों के काल हो, बाबा महाकाल हो ॥ दरबार में भोले के देखो, झूम झुम जयकार

उज्जैन के महाराज हो, दीनो के दीनानाथ हो, तुम कालों के काल हो, बाबा महाकाल हो ॥ दरबार में भोले के देखो, झूम झुम जयकार

उज्जैन में विराजे, महाकाल प्यारे प्यारे, महाकाल प्यारे प्यारे, महाकाल डमरू वाले, क्ष्रिप्रा तट विराजे, महाकाल प्यारे प्यारे, उज्जैन मे विराजे, महाकाल प्यारे प्यारे ॥

मोरे उज्जैन के राजा करो किरपा ॥ दोहा – महाकाल सो नाम नहीं, और उज्जैन सो कोई धाम, करले मेरे महाकाल की भक्ति, तेरे हो

मरना है तो एक बार मरो, फिर चौरासी में पड़ना क्या, हर बार का मरना मरना क्या, हर बार का मरना मरना क्या ॥ करके

प्रभु केवट की नाव चढ़े कभी कभी भगवान को भी भक्तो से काम पड़े । जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े ॥

ना जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं । यही सद् ग्रंथ कहते हैं, यही हरि भक्त गाते हैं ॥ ॥ कि ना

किस लिए आस छोड़े कभी ना कभी, क्षण विरह के मिलन में बदल जाएंगे । नाथ कब तक रहेंगे कड़े एक दिन, देखकर प्रेम आंसू
