
गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय – भजन (Govind Jai Jai, Gopal Jai Jai)
गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय । राधा-रमण हरि, गोविन्द जय-जय ॥ १ ॥ ॥ गोविन्द जय-जय… ॥ ब्रह्माकी जय-जय, विष्णूकी जय-जय । उमा- पति शिव शंकरकी

गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय । राधा-रमण हरि, गोविन्द जय-जय ॥ १ ॥ ॥ गोविन्द जय-जय… ॥ ब्रह्माकी जय-जय, विष्णूकी जय-जय । उमा- पति शिव शंकरकी

मेरो छोटो सो लड्डू गोपाल, सखी री बड़ो प्यारो है। मेरो छोटो सो लड्डू गोपाल, सखी री बड़ो प्यारो है। अँखियाँ मटकाये जब सुबह जागे,

प्रभुजी मोरे/मेरे अवगुण चित ना धरो, समदर्शी प्रभु नाम तिहारो, चाहो तो पार करो । एक लोहा पूजा मे राखत, एक घर बधिक परो ।

हे करुणा मयी राधे, मुझे बस तेरा सहारा है, मुझे बस तेरा सहारा है, अपना लो मुझे श्यामा, तेरे बिन कौन हमारा है, तेरे बिन

मन की तरंग मार लो, बस हो गया भजन। आदत बुरी संवार लो, बस हो गया भजन॥ आये हो तुम कहाँ से, जाओगे तुम कहाँ।

नंद रानी तेरो लाला जबर भयो रे/री महारानी तेरो लाला जबर भयो रे/री मेरी मटकी उलट के पलट गयो रे/री । मुस्कान याकी लगे प्यारी

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी, अँखियाँ प्यासी रे । मन मंदिर की जोत जगा दो, घट घट वासी रे ॥ मंदिर मंदिर मूरत तेरी, फिर
