
चली चली रे पालकी श्री राम की: भजन (Chali Chali Re Palki Shree Ram Ki)
चली चली रे, चली चली रे, चली चली रे पालकी श्री राम की, जय बोलो भक्तो वीर हनुमान की ॥ भक्तों के ये काज संवारे,

चली चली रे, चली चली रे, चली चली रे पालकी श्री राम की, जय बोलो भक्तो वीर हनुमान की ॥ भक्तों के ये काज संवारे,

श्री राम जी का मंदिर बनाएंगे, भगवा ध्वज लहरायेंगे, मंदिर जब ये बन जायेगा, कण कण सारा हर्षायेगा, बच्चा बच्चा ये गायेगा, सारी दुनिया में

जन्मे अवध में, दशरथ के ललना, बाजे शंख और नगाड़े, कौशल्या अंगना, जन्में अवध में, दशरथ के ललना ॥ त्रेतायुग में विष्णु जी ही, राम

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै नकाराय नमः शिवाय ॥ भारत मध्ये स्वयंभू ज्योतिर्लिंग यजामहे हे परब्रह्म परमेश्वर शिव शंभू दयामहे शिप्रा

गल मोत्यां को हार, सिर चुनड़ चमकदार, थे कर सोलह श्रृंगार, माँ बनड़ी सी लागो जी, माँ बनड़ी सी लागो जी ॥ थारे हाथा सोणी

ओ मैया तेरी रहमतों ने, ये करिश्मा किया, छोटी पड़ गई झोली, तूने इतना दिया ॥ अपना बनाया, गले से लगाया, दे दी हमें अपनी,

लूट रहा भंडार है, मैया जी का द्वार है, मौका बड़ा ही सुहाना, जिन्हें चाहिए वो हाजरी लगाना, जिन्हे चाहिए वो हाजरी लगाना ॥ मिलेगा
