
सवारिये ने भूलूं न एक घडी: भजन (Sanwariye Ne Bhule Naa Ek Ghadi)
पूरन ब्रह्म पूरन ज्ञान है घाट माई, सो आयो रहा आनन्द और सुनी मुनि जन, पढ़त वेद शास्त्र अंग मारी जनम गोकुल मे घटे मिटत

पूरन ब्रह्म पूरन ज्ञान है घाट माई, सो आयो रहा आनन्द और सुनी मुनि जन, पढ़त वेद शास्त्र अंग मारी जनम गोकुल मे घटे मिटत

हर भक्तों के दिल से निकले, एक यही आवाज़, ये बाबा बहुत बड़ा है, ये बाबा बहुत बड़ा हैं ॥ बाबा की शक्ति ने देखों,

भजमन राम चरण सुखदाई, भजमन राम चरण सुखदाई ॥ जिहि चरननसे निकसी सुरसरि संकर जटा समाई । जटासंकरी नाम परयो है त्रिभुवन तारन आई ॥

सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है, राजी हैं हम उसी में, जिस में तेरी रजा है, सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा

जन्मे अवध में राम मंगल गाओ री दो सबको ये पैगाम घर घर जाओ री जन्मे अवध में राम मंगल गाओ री कौशल्या रानी को

श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से गाये जाने वाला भजन। मेरे राम मेरे घर आएंगे,

भक्ति और शक्ति के दाता, रामचरण से जिनका नाता, म्हारा बजरंगबली, म्हारा बजरंगबली ॥ राम बिना जिनको कुछ भी ना ध्यावे, राम में हरदम जो
