
हे शिवशंकर, हे करुणाकर – भजन (Hey Shivshankar Hey Karunakar)
हे शिवशंकर हे करुणाकर, हे परमेश्वर परमपिता हर हर भोले नमः शिवाय, नमः शिवाय ओम नमः शिवाय हे शिव शम्भू संकटहर्ता, विघ्नविनाशी मंगलकर्ता जिस पर

हे शिवशंकर हे करुणाकर, हे परमेश्वर परमपिता हर हर भोले नमः शिवाय, नमः शिवाय ओम नमः शिवाय हे शिव शम्भू संकटहर्ता, विघ्नविनाशी मंगलकर्ता जिस पर

अभयदान दीजै दयालु प्रभु, सकल सृष्टि के हितकारी । भोलेनाथ भक्त-दु:खगंजन, भवभंजन शुभ सुखकारी ॥ दीनदयालु कृपालु कालरिपु, अलखनिरंजन शिव योगी । मंगल रूप अनूप

भोले दी बरात चढ़ी, गज वज के, सारीया ने भंग पीती, रज रज के, हो सारीया ने सारीया ने, सारीया ने भगत पियारिया ने, भोलें

भोले की किरपा से हमरे, ठाठ निराले है, हम बाबा वाले है, सुनो जी हम बाबा वाले है ॥ भोले के चलते भक्तों, पहचान बनी

शिव सन्यासी से मरघट वासी से, मैया करूँगी मैं तो ब्याह, मैं शिव को ध्याऊँगी, उन्ही को पाऊँगी, शिव संग करूँगी मैं तो ब्याह, हाँ

खोलो समाधी भोले शंकर, मुझे दरश दिखाओ, इस जग की झूठी माया, से मुझको बचाओ, खोलो समाधि भोले शंकर, मुझे दरश दिखाओ ॥ शिव शिव

यह भजन 15वीं सदी में गुजराती भक्तिसाहित्य के श्रेष्ठतम कवि नरसी मेहता द्वारा मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखा गया है। यह भजन उसी
