
जिसने भी माँ की चौखट पे, सर को झुका लिया: भजन (Jisne Bhi Maa Ki Chaukhat Pe Sar Ko Jhuka Liya)
जिसने भी माँ की चौखट पे, सर को झुका लिया, करके दया भवानी ने, बाहों में उठा लिया, करके दया भवानी ने, बाहों में उठा

जिसने भी माँ की चौखट पे, सर को झुका लिया, करके दया भवानी ने, बाहों में उठा लिया, करके दया भवानी ने, बाहों में उठा

दरस एक बार दिखाना रे, शिव शंकर डमरू वाले ॥ इतना बताओ शम्भू मेरे, तुमने कहाँ कहाँ डाले डेरे, मुझे वो द्वार बताना रे, शिव

कावड़ उठाले ध्यान, शिव का लगाले ॥ दोहा – शिव समान दाता नहीं, विपत्ति निवारण हार, लज्जा सब की राखियों, शिव वर्धा के असवार ॥

कहकर तो देख माँ से, दुःख दर्द तेरे दिल के, ये गले से लगा लेगी, तस्वीर से निकल के, ये गले से लगा लेगी, तस्वीर

मैं थाने सिवरू गजानन देवा, वचनों रा पालनहारा जी ओ ॥ श्लोक – सुंडाला दुःख भंजना, सदा जो वालक वेश, सारों पहले सुमरिये, गवरी नन्द

स्वांसां दी माला नाल सिमरन मैं तेरा नाम, तेरा नाम तेरा नाम तेरा नाम तेरा नाम, बन जावा बन्दा मैं तेरा हे किरपा निधान स्वांसां

नौ नौ रूप मैया के तो, बड़े प्यारे लागे, बड़े प्यारे लागे, सबसे प्यारे माँ के, भवनो के नजारे लागे, सबसे प्यारे माँ के, भवनो
