
श्री जानकीनाथ जी की आरती (Shri Jankinatha Ji Ki Aarti)
ॐ जय जानकीनाथा,जय श्री रघुनाथा ।दोउ कर जोरें बिनवौं,प्रभु! सुनिये बाता ॥ ॐ जय..॥तुम रघुनाथ हमारे,प्राण पिता माता ।तुम ही सज्जन-संगी,भक्ति मुक्ति दाता ॥ ॐ

ॐ जय जानकीनाथा,जय श्री रघुनाथा ।दोउ कर जोरें बिनवौं,प्रभु! सुनिये बाता ॥ ॐ जय..॥तुम रघुनाथ हमारे,प्राण पिता माता ।तुम ही सज्जन-संगी,भक्ति मुक्ति दाता ॥ ॐ

ॐ जय जय शनि महाराज,स्वामी जय जय शनि महाराज ।कृपा करो हम दीन रंक पर,दुःख हरियो प्रभु आज ॥॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥सूरज

चेटी चंड जैसे त्यौहारों तथा सिंधी समाज के अन्य कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा गाई जाने वाली आरती। भगवान झूलेलाल के प्रत्येक मंदिर में यह आरती

ऊँ जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥॥ ऊँ जय कश्यप…॥सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥॥ ऊँ जय

श्री विरंचि कुलभूषण,यमपुर के धामी ।पुण्य पाप के लेखक,चित्रगुप्त स्वामी ॥सीस मुकुट, कानों में कुण्डल,अति सोहे ।श्यामवर्ण शशि सा मुख,सबके मन मोहे ॥ भाल तिलक

हरि ओम श्री शाकुम्भरी अंबा जी की आरती क़ीजोएसी अद्वभुत रूप हृदय धर लीजोशताक्षी दयालू की आरती किजोतुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ,सब घट तुम आप

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ।राजेश्वरी जय नमो नमः ॥करुणामयी सकल अघ हारिणी ।अमृत वर्षिणी नमो नमः ॥ जय शरणं वरणं नमो नमः ।श्री मातेश्वरी जय
