
आरती: श्री बाल कृष्ण जी (Aarti: Shri Bal Krishna Ki Keejen)
आरती बाल कृष्ण की कीजै,अपना जन्म सफल कर लीजै ॥ श्री यशोदा का परम दुलारा,बाबा के अँखियन का तारा ।गोपियन के प्राणन से प्यारा,इन पर

आरती बाल कृष्ण की कीजै,अपना जन्म सफल कर लीजै ॥ श्री यशोदा का परम दुलारा,बाबा के अँखियन का तारा ।गोपियन के प्राणन से प्यारा,इन पर

आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…दुर्योधन को मेवा त्यागो,साग विदुर घर खायो प्यारे मोहन,आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… भिलनी के बैर सुदामा के तंडुलरूचि रूचि भोग

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥॥ जय जय श्री शनिदेव..॥श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।नीलाम्बर धार नाथ

जयति जय गायत्री माता,जयति जय गायत्री माता ।सत् मारग पर हमें चलाओ,जो है सुखदाता ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जगपालक कर्त्री

आरती श्री गुरुदेव जी की गाऊँ ।बार-बार चरणन सिर नाऊँ ॥त्रिभुवन महिमा गुरु जी की भारी ।ब्रह्मा विष्णु जपे त्रिपुरारी ॥ राम कृष्ण भी बने

आरती श्री रामायण जी की ।कीरति कलित ललित सिय पी की ॥गावत ब्रहमादिक मुनि नारद ।बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥शुक सनकादिक शेष अरु शारद ।बरनि पवनसुत

श्री राम नवमी, विजय दशमी, सुंदरकांड, रामचरितमानस कथा और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से की जाने वाली आरती।आरती कीजै रामचन्द्र जी की।हरि-हरि दुष्टदलन
