
आरती: भगवान श्री शीतलनाथ जी (Arti Bhagwan Shri Sheetalnath Ji)
ॐ जय शीतलनाथ स्वामी,स्वामी जय शीतलनाथ स्वामी।घृत दीपक से करू आरती,घृत दीपक से करू आरती।तुम अंतरयामी,ॐ जयशीतलनाथ स्वामी॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥भदिदलपुर में जनम लिया

ॐ जय शीतलनाथ स्वामी,स्वामी जय शीतलनाथ स्वामी।घृत दीपक से करू आरती,घृत दीपक से करू आरती।तुम अंतरयामी,ॐ जयशीतलनाथ स्वामी॥॥ ॐ जय शीतलनाथ स्वामी…॥भदिदलपुर में जनम लिया

श्री भगवत भगवान की है आरती,पापियों को पाप से है तारती।ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ,ये पंचम वेद निराला,नव ज्योति जलाने वाला।हरि नाम यही हरि

जय अहोई माता,जय अहोई माता ।तुमको निसदिन ध्यावत,हर विष्णु विधाता ॥ॐ जय अहोई माता ॥ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला,तू ही है जगमाता ।सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता ॥ॐ

आरती श्री वृषभानुसुता की,मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,विमल विवेकविराग विकासिनि ।पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि,सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ॥॥ आरती श्री

कार्तिकेय जी की आरती –जय जय आरती वेणु गोपालावेणु गोपाला वेणु लोलापाप विदुरा नवनीत चोराजय जय आरती वेंकटरमणावेंकटरमणा संकटहरणासीता राम राधे श्याम जय जय आरती

जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥भूकैलासा ऐसी ही कवला नगरी ।शांतादुर्गा तेथे भक्तभवहारी ।असुराते मर्दुनिया सुरवरकैवारी ।स्मरती विधीहरीशंकर

चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी,जग को तारो भोली माँजन को तारो भोली माँ,काली दा पुत्र पवन दा घोड़ा ॥॥ भोली माँ ॥ सिन्हा पर भाई असवार,भोली
