
श्री सीता आरती (Shree Sita Mata Aarti)
आरती श्री जनक दुलारी की ।सीता जी रघुवर प्यारी की ॥जगत जननी जग की विस्तारिणी,नित्य सत्य साकेत विहारिणी,परम दयामयी दिनोधारिणी,सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।सीता जी रघुवर प्यारी की ॥जगत जननी जग की विस्तारिणी,नित्य सत्य साकेत विहारिणी,परम दयामयी दिनोधारिणी,सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥

जय शनि देवा, जय शनि देवा,जय जय जय शनि देवा ।अखिल सृष्टि में कोटि-कोटि जन,करें तुम्हारी सेवा ।जय शनि देवा, जय शनि देवा,जय जय जय

इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ।इह विधि मंगल आरति कीजे,पंच परमपद भज सुख लीजे ॥पहली आरति श्रीजिनराजा,भव दधि पार उतार जिहाजा

जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥सिद्धार्थ नृप नन्द दुलारे,त्रिशला के जाये ।कुण्डलपुर अवतार लिया,प्रभु सुर नर

ॐ जय महावीर प्रभु,स्वामी जय महावीर प्रभो ।जगनायक सुखदायक,अति गम्भीर प्रभो ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥कुण्डलपुर में जन्में,त्रिशला के जाये ।पिता सिद्धार्थ राजा,सुर नर हर्षाए ॥॥ॐ

ॐ जय महावीर प्रभु,स्वामी जय महावीर प्रभु ।कुण्डलपुर अवतारी,चांदनपुर अवतारी,त्रिशलानंद विभु ॥सिध्धारथ घर जन्मे,वैभव था भारी ।बाल ब्रह्मचारी व्रत,पाल्यो तप धारी ॥॥ॐ जय महावीर प्रभु…॥

श्री गुरु गोरक्षनाथ जी की संध्या आरतीऊँ गुरुजी शिव जय जय गोरक्ष देवा। श्री अवधू हर हर गोरक्ष देवा ।सुर नर मुनि जन ध्यावत, सुर
