
दुदोजी को परचा देना
दुदोजी को परचा देना जम्भेश्वर जी ग्वाल बालों के साथ गऊ आदि पशु धन को लेकर वन से लौट आये थे। बालक वहीं

दुदोजी को परचा देना जम्भेश्वर जी ग्वाल बालों के साथ गऊ आदि पशु धन को लेकर वन से लौट आये थे। बालक वहीं

भुवा तांतू को शब्दोपदेश लोहटजी की छोटी बहन जो ननेऊ गाँव में विवाहित थी एक दिन अपने भतीजे को देखने हेतु पीपासर चली आयी।

पूल्हाजी को स्वर्ग दिखाना विल्होजी उवाच-हे गुरु देव ! गोरखयति को अपना गुरु भाव स्वीकार

जांगलू की कंकेड़ी धाम (Jangloo Dham) नाथोजी कहते हैं- हे वील्हा! तुम्हारे यहां इस मंच में सम्मिलित होने से पूर्व,

निर्माण कालीन समराथल ……..समराथल कथा भाग 16 हमारे समाज के जिन महानुभावों ने साठ वर्ष को पार कर दिया है वे अब भी

संत साहित्य ..(:- समराथल कथा भाग 15 🙂 साहित्य के क्षेत्र में गुरु जम्भेश्वर जी के कुछ ही वर्षों के पश्चात् संत शिरोमणि वील्होजी का

श्री गुरु जम्भेश्वर से उतरकालिन समराथल …….(-: समराथल कथा भाग 14:-) वि. सं. 1508 भादव कृष्ण अष्टमी के समय इस मरूभूमि में जम्भेश्वर अवतार से
