जिंदगी एक किराये का घर है – भजन (Zindgai Ek Kiraye Ka Ghar Hai)

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जिंदगी एक किराये का घर है,
एक न एक दिन बदलना पड़ेगा
मौत जब तुझको आवाज देगी,
घर से बाहर निकलना पड़ेगा ॥

मौत का बजा जिस दिन डंका
फूँक दी तब पल में सोने की लंका
कर गयी मौत रावण का बांका
वैसे तुझको भी जलना पड़ेगा ॥

जिंदगी एक किराये का घर है,
एक न एक दिन बदलना पड़ेगा ॥

रात के बाद होगा सवेरा
देखना हो अगर दिन सुनहरा
पाँव फूलों पे रखने से पहले
तुझको काँटों पे चलना पड़ेगा ॥

जिंदगी एक किराये का घर है,
एक न एक दिन बदलना पड़ेगा ॥

ये जवानी है दो दिन का सपना,
ढूँढ ले तू जल्द राम अपना
ये जवानी अगर ढल गयी तो,
उमर भर हाथ मलना पड़ेगा ॥

जिंदगी एक किराये का घर है,
एक न एक दिन बदलना पड़ेगा ॥

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ये तसवुर ये जोशो-जवानी
चंद लम्हों की है यह कहानी
ये दिया शाम तक देख लेना
चढ़ते सूरज को ढलना पड़ेगा ॥

जिंदगी एक किराये का घर है,
एक न एक दिन बदलना पड़ेगा ॥

जिंदगी एक किराये का घर है,
एक न एक दिन बदलना पड़ेगा
मौत जब तुझको आवाज देगी,
घर से बाहर निकलना पड़ेगा ॥

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Sandeep Bishnoi

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