
नंदभवन में उड़ रही धूल – भजन (Nand Bhavan Me Ud Rahi Dhul)
नंदभवन में उड़ रही धूल, धूल मोहे प्यारी लगे ॥ उड़ उड़ धूल मेरे माथे पे आवे, उड़ उड़ धूल मेरे माथे पे आवे, मैंने

नंदभवन में उड़ रही धूल, धूल मोहे प्यारी लगे ॥ उड़ उड़ धूल मेरे माथे पे आवे, उड़ उड़ धूल मेरे माथे पे आवे, मैंने

पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे, हमारा कुछ ना बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी, पकड़ लों हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे ॥ धरी

हे गोविन्द हे गोपाल अब तो जीवन हारे । अब तो जीवन हारे, प्रभु शरण हैं तिहारे ॥ हे गोविन्द हे गोपाल अब तो जीवन

राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा, झुक आये बदरा झुकी आये बदरा, राधे झूलन पधारो झुकी आये बदरा, झुक आये बदरा झुकी आये बदरा, साजो

आई बागों में बहार, झूला झूले राधा प्यारी । झूले राधा प्यारी, हाँ झूले राधा प्यारी ॥ आई बागों में बहार, झूला झूले राधा प्यारी

झूला पड्यो है कदम्ब की डार, झुलावे ब्रज नारी, ब्रज नारी रे ब्रज नारी, ब्रज नारी सखियाँ सारी, झूला पड्यो हैं कदम्ब की डार, झुलावे

झूलन चलो हिंडोलना, वृषभान नंदनी, झूलन चलो हिडोलना, वृषभान नंदनी। सावन की तीज आई, नवघोर घटा छाई, सावन की तीज आई, नवघोर घटा छाई, नवघोर
