
श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् (Vindhyeshwari Stotram)
निशुम्भ शुम्भ गर्जनी, प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी । बनेरणे प्रकाशिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ त्रिशूल मुण्ड धारिणी, धरा विघात हारिणी । गृहे-गृहे निवासिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ दरिद्र

निशुम्भ शुम्भ गर्जनी, प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी । बनेरणे प्रकाशिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ त्रिशूल मुण्ड धारिणी, धरा विघात हारिणी । गृहे-गृहे निवासिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ दरिद्र

दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी । दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी । दुर्गतोद्वारिणी दुर्ग निहन्त्री दुर्गमापहण । दुर्गम ज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला । दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी । दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥ सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि

॥ श्री बगलाष्टक ॥ पीत सुधा सागर में विराजत, पीत-श्रृंगार रचाई भवानी । ब्रह्म -प्रिया इन्हें वेद कहे, कोई शिव प्रिया कोई विष्णु की रानी

ओम् ब्रह्मास्त्र-रुपिणी देवी, माता श्रीबगलामुखी । चिच्छिक्तिर्ज्ञान-रुपा च, ब्रह्मानन्द-प्रदायिनी ॥ 1 ॥ महा-विद्या महा-लक्ष्मी, श्रीमत् -त्रिपुर-सुन्दरी । भुवनेशी जगन्माता, पार्वती सर्व-मंगला ॥ 2 ॥ ललिता

आत्मा रामा आनंद रमना आत्मा रामा आनंद रमना अच्युत केशव हरि नारायण अच्युत केशव हरि नारायण भवभय हरणा वंदित चरणा भवभय हरणा वंदित चरणा रघुकुलभूषण

॥ श्रीसीताष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॥ अथ श्रीमदानन्दरामायणान्तर्गत श्री सीताष्टोत्तरशतनामावलिः ॥ ॐ सीतायै नमः । ॐ जानक्यै नमः । ॐ देव्यै नमः । ॐ वैदेह्यै नमः ।
