
सच्चा है माँ का दरबार, मैय्या का जवाब नहीं: भजन (Saccha Hai Maa Ka Darbar, Maiya Ka Jawab Nahi)
दरबार हजारो देखे है, पर माँ के दर सा कोई, दरबार नहीं, जिस गुलशन मे, माँ का नूर ना हो, ऐसा तो कोई गुलज़ार नहीं,

दरबार हजारो देखे है, पर माँ के दर सा कोई, दरबार नहीं, जिस गुलशन मे, माँ का नूर ना हो, ऐसा तो कोई गुलज़ार नहीं,

कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना । जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ॥ ना

आयी महादेवी अवतार, भवानी मोरे अंगना में ॥ रहे निमंत्रण डार, खेरे की खेड़ापति, मोरे अंगना जाओ पधार ॥ लकी द्वार अर्जी करे, महादेवी अवतार,

मैं चाहूँ सदा दर तेरे आना, तू यूँ ही बुलाना दातिए, तेरा दर ही तो सबका ठिकाना, तेरा दर ही तो सबका ठिकाना, तू यूँ

म्हारे सर पर है मैया जी रो हाथ, कोई तो म्हारो कई करसी ॥ जे कोई म्हारी मैया जी ने, साँचे मन से ध्यावे, काल

मैया के चरणों में, झुकता है संसार, तीनों लोक में होती, माँ तेरी जय जयकार ॥ सुख में तो मैया तुझसे, दूर रहा मैं, धन

बनकर के धूल के कण, चरणों से लिपट जाऊं, तेरे आँचल की छैया, मैं आके सिमट जाऊं, बनकर के धुल के कण, चरणों से लिपट
