हे शिव शंकर भोले बाबा,
मैं तेरे गुण गाऊं,
ऐसा वर दे इन चरणों में,
ऐसा वर दे इन चरणों में,
सगरे जनम बिताऊं,
हे शिव शंकर भोलें बाबा,
मैं तेरे गुण गाऊं ॥
सोऽहं कहके मैं जन्मी थी,
तूने शिवम बताया,
धन्य भया ये जीवन मेरा,
सारा भरम मिटाया,
किरपा कर तू कर दे मुझपे,
किरपा कर तू कर दे मुझपे,
भव सागर तर जाऊं,
हे शिव शंकर भोलें बाबा,
मैं तेरे गुण गाऊं ॥
द्वंद्व द्वेष सब मिट गए मेरे,
द्वार पे आके तेरे,
जन्म जन्म की धुंध छटी है,
पाप कटे है मेरे,
कुछ ऐसा कर दे हे भोले,
कुछ ऐसा कर दे हे भोले,
परम शांति मैं पाऊं,
हे शिव शंकर भोलें बाबा,
मैं तेरे गुण गाऊं ॥
सदा मांगती रही मैं तुझसे,
ऋणी रही मैं तेरी,
दयानिधि कल्याण करो अब,
सुन लो विनती मेरी,
मेरे सर पे ऋण है तेरा,
मेरे सर पे ऋण है तेरा,
कैसे उसे चुकाऊं,
हे शिव शंकर भोलें बाबा,
मैं तेरे गुण गाऊं ॥
Jinke Ojasvi Vachno Se (Jinke Ojasvi Vachno Se)
कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 6 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 6)
चित्तौड़ की कथा भाग 2(JambhBhakti.com)
हे शिव शंकर भोले बाबा,
मैं तेरे गुण गाऊं,
ऐसा वर दे इन चरणों में,
ऐसा वर दे इन चरणों में,
सगरे जनम बिताऊं,
हे शिव शंकर भोलें बाबा,
मैं तेरे गुण गाऊं ॥








