राम नाम सुखदाई, भजन करो भाई
ये जीवन दो दिन का
॥ राम नाम सुखदाई…॥
ये तन है जंगल की लकड़ी, ये तन है जंगल की लकड़ी
आग लगे जल जाए, भजन करो भाई
ये जीवन दो दिन का
॥ राम नाम सुखदाई…॥
ये तन है कागज की पूडिया, ये तन है कागज की पुडिया
हवा चले उड़ जाई, भजन करो भाई
ये जीवन दो दिन का
॥ राम नाम सुखदाई…॥
ये तन है माटी का ढेला, ये तन है माटी का ढेला
बूँद पड़े गल जाई, भजन करो भाई
ये जीवन दो दिन का
॥ राम नाम सुखदाई…॥
ये तन है फूलो का बगीचा, ये तन है फूलो का बगीचा
धूप पड़े मुरझाई, भजन करो भाई
ये जीवन दो दिन का
॥ राम नाम सुखदाई…॥
ये तन है कच्ची है हवेली, ये तन है कच्ची है हवेली
पल मे टूट जाई, भजन करो भाई
ये जीवन दो दिन का
॥ राम नाम सुखदाई…॥
भगवद् गीता आरती (Aarti Shri Bhagwat Geeta)
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 5 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 5)
ये तन है सपनो की माया, ये तन है सपनो की माया
आँख खुले कुछ नाही, भजन करो भाई
ये जीवन दो दिन का
॥ राम नाम सुखदाई…॥
राम नाम सुखदाई, भजन करो भाई
ये जीवन दो दिन का








