बुधवार • गणेश मंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय

हर शब्द का अर्थ, सरल हिंदी में

॥ जम्भ भक्ति ॥

मंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

हर शुभ काम शुरू करने से पहले श्री गणेश को याद करने का सबसे प्रसिद्ध मंत्र।

वक्रतुण्ड

घुमावदार सूँड वाले

वक्र यानी टेढ़ा, तुण्ड यानी सूँड। गणेश जी की मुड़ी हुई सूँड के कारण उन्हें वक्रतुण्ड कहते हैं।

महाकाय

विशाल शरीर वाले

महाकाय का अर्थ है विशाल काया वाले। उनका बड़ा रूप उनकी महानता का प्रतीक है।

सूर्यकोटि समप्रभ

करोड़ सूर्यों जैसी आभा

जिनका तेज करोड़ों सूर्यों के समान है, ऐसे प्रकाशमान प्रभु।

निर्विघ्नं कुरु मे देव

मेरे काम निर्विघ्न करें

हे देव, मेरे कामों से सारी बाधाएँ दूर करें।

सर्वकार्येषु सर्वदा

सब कामों में, हमेशा

मेरे सभी कामों में, हर समय आपकी कृपा बनी रहे।

पूरा अर्थ

एक वाक्य में

हे घुमावदार सूँड और विशाल शरीर वाले, करोड़ सूर्यों जैसे तेजस्वी गणेश जी, मेरे सभी काम सदा बिना विघ्न के पूरे करें।

कब बोलें

जपने का तरीका

नया काम, पढ़ाई, यात्रा या पूजा शुरू करने से पहले हाथ जोड़कर एक या तीन बार यह मंत्र बोलें। बुधवार को 108 बार जप भी किया जाता है।

॥ जम्भ भक्ति ॥

मंत्र और अर्थ पढ़ें

वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र, शब्दार्थ सहित।

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