पूजा के नियम
दिवाली से पहले जान लें, साथ में दीप मंत्र
॥ जम्भ भक्ति ॥
देवताओं के सामने घी का दीपक उत्तम माना जाता है। सरसों या तिल के तेल का दीपक भी जलाया जा सकता है।
घी का दीपक भगवान के दाईं ओर और तेल का दीपक बाईं ओर रखने की मान्यता है।
बाती पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। दक्षिण दिशा में बाती केवल यम दीपदान में रखी जाती है।
टूटा या खंडित दीपक पूजा में न जलाएँ। दीपक को फूंक मारकर कभी न बुझाएँ।
दीप मंत्र
जो शुभ करता है, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देता है और शत्रु-बुद्धि का नाश करता है, उस दीप की ज्योति को नमन।
दीप मंत्र
दीप की ज्योति परब्रह्म और भगवान जनार्दन का रूप है। यह दीप मेरे पाप हरे, संध्या दीप को नमन।
॥ जम्भ भक्ति ॥
शुभं करोति मंत्र और उसका अर्थ, रोज़ शाम दीपक जलाते समय बोलें।
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