गुरुवार • विष्णु स्तुति
विष्णु स्तुति, शब्द-शब्द का अर्थ
॥ जम्भ भक्ति ॥
श्लोक
भगवान विष्णु के ध्यान का सबसे प्रसिद्ध श्लोक, जिसे पूजा की शुरुआत में बोला जाता है।
जिनका रूप सदा शांत है, जो कभी विचलित नहीं होते।
जो शेषनाग की शय्या पर लेटे हैं और जिनकी नाभि से कमल निकला है, जिस पर ब्रह्मा विराजते हैं।
जो देवताओं के स्वामी हैं और पूरा विश्व जिन पर टिका है।
जो आकाश की तरह सर्वव्यापी हैं और जिनका रंग बादलों जैसा श्याम है। जिनके सभी अंग शुभ हैं।
दूसरी पंक्ति
लक्ष्मी जी के पति, कमल जैसे नेत्रों वाले, जिन्हें योगी ध्यान से ही पा सकते हैं।
अंत
संसार के भय को हरने वाले, सभी लोकों के एकमात्र स्वामी भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।
सुबह पूजा की शुरुआत में, गुरुवार को और हर एकादशी पर यह स्तुति पढ़ें। आज रमा एकादशी पर इसका पाठ विशेष माना जाता है।
॥ जम्भ भक्ति ॥
दोनों श्लोक संस्कृत में, जम्भ भक्ति पर।
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