शनिवार • आरती अर्थ सहित
शनिदेव की आरती, हर पद का अर्थ
॥ जम्भ भक्ति ॥
पद १
भक्तों का हित करने वाले शनिदेव, आपकी जय हो। आप सूर्य देव के पुत्र हैं और छाया आपकी माता हैं।
पद २
श्याम वर्ण, तिरछी दृष्टि और चार भुजाओं वाले, नीले वस्त्र पहने, हाथी की सवारी करने वाले।
पद ३
सिर पर मुकुट, चमकता माथा और गले में मोतियों की माला, जिस पर मैं बलिहारी जाऊँ।
पद ४
आपको लड्डू, मिठाई, पान-सुपारी चढ़ते हैं। लोहा, तिल, तेल और उड़द आपको प्रिय हैं।
पद ५
देवता, दानव, ऋषि-मुनि और सभी नर-नारी आपका स्मरण करते हैं। विश्वनाथ आपकी शरण में ध्यान धरते हैं।
शनिदेव सूर्य और छाया के पुत्र और नवग्रहों में से एक हैं। उन्हें कर्म के अनुसार फल देने वाला, यानी न्याय का देवता माना जाता है।
शनिवार को पीपल के नीचे या शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएँ, काले तिल और उड़द का दान करें और यह आरती गाएँ।
मान्यता है कि ईमानदारी, मेहनत और ज़रूरतमंदों की सेवा से शनिदेव सबसे ज़्यादा प्रसन्न होते हैं।
॥ जम्भ भक्ति ॥
श्री शनिदेव की आरती, सभी पद एक साथ।
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