मंगलवार • हनुमानाष्टक
आठ संकट, आठ पद, सरल अर्थ
॥ जम्भ भक्ति ॥
बालपन में हनुमान जी ने सूर्य को मुँह में रख लिया तो तीनों लोकों में अँधेरा छा गया। देवताओं की विनती पर उन्होंने सूर्य को छोड़ा।
बालि के डर से सुग्रीव पर्वत पर रहते थे। हनुमान जी ब्राह्मण का रूप धरकर श्रीराम को लाए और सुग्रीव का शोक दूर किया।
अंगद के साथ खोज में निकले वानर समुद्र तट पर थक गए थे। हनुमान जी सीता माता का पता लाए और सबके प्राण बचाए।
रावण के डर से दुखी सीता जी को हनुमान जी ने प्रभु की मुद्रिका देकर ढाढ़स बँधाया और राक्षसों को मारा।
लक्ष्मण मूर्छित हुए तो हनुमान जी सुषेण वैद्य को लाए और द्रोणगिरि पर्वत उठाकर संजीवनी लाए।
युद्ध में जब सबको नागपाश में बाँधा गया, हनुमान जी गरुड़ जी को लाए और बंधन कटवाए।
अहिरावण राम-लक्ष्मण को पाताल ले गया। हनुमान जी ने वहाँ जाकर अहिरावण को सेना समेत मारा।
देवताओं के बड़े काम करने वाले हे महावीर, मुझ गरीब का ऐसा कौन सा संकट है जो आपसे न टले? जल्दी मेरे संकट दूर करो।