आरती • अर्थ सहित
सबसे लोकप्रिय आरती, सरल हिंदी में
॥ जम्भ भक्ति ॥
पद १
हे जगत के स्वामी हरि, आपकी जय हो। आप भक्तों के संकट पल भर में दूर कर देते हैं।
पद २
जो आपका ध्यान करता है उसे फल मिलता है, मन का दुख मिटता है, घर में सुख-संपत्ति आती है और तन के कष्ट दूर होते हैं।
पद ३
आप ही मेरे माता-पिता हैं, मैं और किसकी शरण लूँ? आपके सिवा कोई दूसरा नहीं जिससे आशा रखूँ।
पद ४
आप पूर्ण परमात्मा हैं और सबके मन की जानते हैं। आप ही परब्रह्म परमेश्वर और सबके स्वामी हैं।
पद ५
आप दया के सागर और सबका पालन करने वाले हैं। मैं फल की इच्छा रखने वाला नासमझ सेवक हूँ, आप मेरे स्वामी हैं, कृपा करें।
यह आरती पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी ने 1870 में लिखी थी। भगवान विष्णु को समर्पित होने पर भी इसे हर पूजा में गाया जाता है।
॥ जम्भ भक्ति ॥
ॐ जय जगदीश हरे की पूरी आरती, सभी पद एक साथ।
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