मंत्र • अर्थ सहित

महामृत्युंजय मंत्र: अर्थ और जप विधि

भगवान शिव का रक्षा मंत्र

॥ जम्भ भक्ति ॥

मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

ऋग्वेद और यजुर्वेद में आया यह मंत्र भगवान शिव (त्र्यम्बक) को समर्पित है।

१

त्र्यम्बकं यजामहे

हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं...

२

सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

...जो सुगंधित हैं और सबका पोषण कर बल बढ़ाने वाले हैं।

३

उर्वारुकमिव बन्धनान्

जैसे पकी हुई ककड़ी बेल के बंधन से अपने आप अलग हो जाती है...

४

मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

...वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, पर अमृत (मोक्ष) से दूर न करें।

५

जप विधि

स्नान के बाद शिवलिंग या शिव चित्र के सामने बैठें और रुद्राक्ष की माला से 108 बार जप करें। सोमवार और प्रदोष विशेष माने जाते हैं।

॥ जम्भ भक्ति ॥

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महामृत्युंजय मंत्र, अर्थ और महत्व, जम्भ भक्ति पर।

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