कार्तिक माहात्म्य • अध्याय 3
शंखासुर और मत्स्य अवतार की कथा
॥ जम्भ भक्ति ॥
सत्यभामा ने पूछा, प्रभु! सभी महीनों में कार्तिक और सभी तिथियों में एकादशी ही आपको प्रिय क्यों है?
श्रीकृष्ण ने बताया कि यही प्रश्न राजा पृथु ने देवर्षि नारद से पूछा था, और नारद जी ने शंखासुर की कथा सुनाई।
शंख नाम का बलवान राक्षस इंद्र और सब देवताओं के अधिकार छीन चुका था। देवता डरकर सुमेरु पर्वत की गुफाओं में छिप गए।
शंखासुर ने सोचा कि वेद मंत्रों के बल से ही देवता बलवान हैं। वह वेद हर लाया, पर वेद उसके हाथ से छूटकर जल में समा गए।
ब्रह्मा जी देवताओं के साथ भगवान विष्णु के पास गए और गाजे-बाजे, धूप-दीप से पूजा कर उन्हें योगनिद्रा से जगाया।
प्रसन्न भगवान बोले: मैं मत्स्य रूप में जाकर शंखासुर को मारूँगा और वेद लाऊँगा। अब से हर कार्तिक मास में मैं जल में वास करूँगा।
इसीलिए मान्यता है कि कार्तिक में सुबह स्नान करने वाला यज्ञ के अवभृथ स्नान जितना पुण्य पाता है।
भगवान ने कहा: कार्तिक शुक्ल एकादशी को तुमने मुझे जगाया, इसलिए यह तिथि मुझे अत्यंत प्रिय है। यही देवउठनी एकादशी है।
॥ जम्भ भक्ति ॥
कार्तिक मास माहात्म्य कथा, अध्याय 3 विस्तार से।
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